प्रयुक्त कार खरीदना युक्तियाँ | क्या आपका दूसरा हाथ आकस्मिक है! यह कैसे पहचान करने के लिए है; इस्तेमाल की हुई कार खरीदते समय इन 7 बातों का ध्यान रखें, आपको पछताना नहीं पड़ेगा | आपकी सेकंड की कार एक्सीलटल नहीं है! ऐसी पहचान; पुरानी कार खरीदने के लिए इन 7 चीजों का ध्यान रखें, पछताना नहीं पडेगा

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नई दिल्ली2 घंटे पहले

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सेकंड ब्रांड कार खरीदने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आंख बंद करके विश्वास न करें, ऐसे स्रोत से गाड़ी चलाएं जहां गाड़ी और गाड़ी मालिक दोनों सामने हों।

  • मैकेनिक पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करना पड़ सकता है भारी, कमीशन के चक्कर में आपसे झूठ बोला जा सकता है
  • डीलर्स का कार कलेक्शन देखकर इम्प्रेस न हों, अगर काफी बड़ा निर्णय दिया जा रहा है तो सोच-समझ कर निर्णय लें

महामारी के कारण लोग सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट से ज्यादा खुद के वाहन को प्राथमिकता दे रहे हैं। कुछ लोग नए वाहन खरीद रहे हैं, तो कुछ का रुझान सेकंड वाहनों की तरफ है। लेकिन हाल ही में कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें अनलाइन सेकंड-ब्रांड्स वाहन खरीदने के चक्कर में ग्राहक बाड़ का शिकार हो गए हैं, हालांकि कई बार लोकल मार्केट से सेकंड ब्रांड वाहन खरीदने का समय भी ग्राहकों को ठग लिया जाता है। अगर आप भी सेकंड सेकंड कार खरीदने का सोच रहे हैं, तो इस रिपोर्ट में पढ़ें कि खरीदारी करते समय आप कैसे सुरक्षित रह सकते हैं …

1. मैकेनिक पर जरूरत से ज्यादा निर्भर न करें

  • कई बार लोगों को कहते सुना जाएगा कि सेकंड ब्रांड कार खरीदने जा रहे हैं, तो गाड़ी चेक करने के लिए खुद का मैकेनिक लेकर जाना चाहिए। लोग ऐसा करते भी हैं और यहीं से शुरू हो जाते हैं हमारी परेशानियां हैं। यूज्ड कार डीलर सूर्य यादव ने हमें बताया कि अक्सर लोग सेकंड फोन कार पसंद करने आते हैं तो अपना मैकेनिक के साथ आते हैं। उसके बाद मैकेनिक के बोलने पर ग्राहक आंख बंद करके कार खरीद भी लेता है। यही उनकी सबसे बड़ी गलती होती है कि वह मैकेनिक पर जरूरत से ज्यादा भरोसा कर लेते हैं।
  • उन्होंने बताया कि मैकेनिक और कर्मचारियों का एक दूसरे से आया दिन काम रहता है क्योंकि दोनों के एक दूसरे पर निर्भर हैं जबकि ग्राहक का मैकेनिक से कभी कभार ही काम पड़ता है। ऐसे में कोई भी मैकेनिक हो, सभी का कमीशन लेना होता है, फिर ग्राहक चाहें उसे अपने साथ ही क्यों ना लाया जाए। अगर कार बिकती है तो दो से तीन हजार रुपए का कमीशन मैकेनिक का तय हो जाता है, और ग्राहक को इस बात का पता भी नहीं चलता कि वह ठगा जा चुका है। इसलिए मैकेनिक पर जरूरत से ज्यादा विश्वास न करें क्योंकि वह अपने कमीशन के चक्कर में आपसे झूठ बोलने से पहले जरा भी नहीं सोचेगा, ताकि डीलर से उसका काम चलता रहे।

2. डीलर के कार कलेक्शन को देखकर इम्प्रेस न हों

  • अक्सर लोग यूज्ड कार डीलर्स का कार कलेक्शन देखकर इम्प्रेस हो जाते हैं और मन में ये धारणा बना लेते हैं कि इसके पास ज्यादा गाड़ियां हैं तो यह अच्छा डीलर होगा। लेकिन यहीं पर ग्राहक फिर धोखा खा जाता है। क्योंकि ऐसे डीलर सभी प्रकार की गाड़ियां ले लेते हैं, फिर चाहते हैं कि वे अच्छी हों या उनमें कोई खराबी हो।
  • उसके बाद डीलर गाड़ियों का रंग-रोगन करवा कर या उन्हें थोड़ा काम करवाकर उन्हें बेचने के लिए प्रदर्शन में लगा देता है। गाड़ी में यदि कोई प्रॉब्लम भी होती है तो मैकेनिक इतनी सफाई से लिपा-पोती करते हैं कि आम इंसान का समझ पाना नामुमकिन हो जाता है और ग्राहक बड़े स्टॉक के दिखावे में आकर उन पर विश्वास करके गाड़ी खरीद लेता है। इस समस्या से बचने के लिए ऐसे डीलर के पास जाओ, जिनके पास लिमिटेड स्टॉक हो लेकिन अच्छा स्टॉक हो।

3. जरूरत से ज्यादा आरक्षण मिल रहा है, तो कुछ चौंकाने वाला हो सकता है

  • कई बार डीलर एक्सीलटल गाड़ी ले लेते हैं और उसमें काम करवा कर उसका अच्छा तरह से रंग-रोगन कर उसे बेचने के लिए ढेर कर देते हैं। गाड़ी को जल्द से जल्द निकालने के चक्कर में डीलर ग्राहकों का 30 से 40 हजार या उससे ज्यादा का भी विनियमन दे देते हैं और ग्राहक सोचता है कि मैंने पैसे कम करवा के लिए या यह मेरे बजट में आ रहा है और फिर धोखा खा जाता है।
  • अगर डीलर बड़ा प्रतिबंध दे रहा है और गाड़ी की तारीफों के पुल बांड रहा है तो थोड़ा सतर्क हो जाने की जरूरत है, क्योंकि अगर बात अच्छी होगी तो कोई भी उसकी कीमत से कॉम्प्रोमाइज नहीं करेगा लेकिन अगर कुछ गौर होगा तो ज्यादा से ज्यादा अंकों द्वारा। गाड़ी निकालने की हर संभव कोशिश की जाएगी। इसलिए अगर जरूरत से ज्यादा निष्कर्ष मिले तो लालच में न आए बल्कि सोचें कि डीलर अचानक से इतना बड़ा आरक्षण क्यों दे रहा है।

4. स्वचालित रूप से अधिक पूर्वी को प्राथमिकता दें

  • इस समय ऑफ़लाइन ठगी के रोजाना कई मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें जालसाज की ही गाड़ी अपने नाम से लेकर ऑफलाइन प्लेटफार्म पर डाल देते हैं वो भी बेहद कम कीमत पर, खुद की पहचान आर्मी वाले के तौर पर बता कर लोगों को अपने जाल में डालते हैं। फांते हैं और उन्हें पैसे ऐंठ लेते हैं।
  • इसलिए ऑफ़लाइन प्लेटफार्म के चक्कर में ना पड़ा और किसी पर भी आंख बंद करके विश्वास न करें नहीं तो गहरा पड़ सकता है। बेहतर होगा कि गाड़ी फिजिकली देख कर ऐसा करें कि तसल्ली से देखा-परखा जा सके। इससे फायदा यह होगा कि गाड़ी और गाड़ी मालिक आपके सामने होंगे और आप बेहतर तरीके से निर्णय ले लेंगे।

5. उत्साहित न हो, बल्कि उसे चलाकर देखें

  • अक्सर देखने में आता है कि कुछ लोग गाड़ी देखकर उत्साहित हो जाते हैं और आपके इसी उतावलेपन को डीलर भांप लेता है फायदा पाने के लिए। वह कार की सारी सैनिकें गिना अच्छी-अच्छी चीजें दिखाती, एसी बारी कर देती, स्पीकर्स का साउंड सुना देती, गाड़ी की चमक-दमक से रूबरू कराती और हम उसे सही मान लेते। वह यह भी दिलासा देगा कि ‘बेफ्रिक रहो! गाड़ी में कोई प्रॉब्लम नहीं आएगी ‘।
  • बेवजह उत्साहित होने की बजाए अपने विवेक से काम लें। गाड़ी की अच्छी तरह के गिरने से करें। यदि आप अनुभवी नहीं भी हैं तो भी गाड़ी रोक कर टैक्सी में बैठकर या बाहर निकलकर उसके अनियमित साउंड और वाइब्रेशन का पता चला सकते हैं।) यदि कोई अनियमित साउंड या वाइब्रेशन होता है, तो डीलर से उसके एफएक्यू। हालांकि पुरानी गाड़ी में थोड़ा बहुत काम निकलता है, जो थोड़े बहुत खर्च में ठीक किया जा सकता है, बस इंजन में प्रॉब्लम होना चाहिए।
  • इसके अलावा गाड़ी का कम से कम 2 से Three किमी। का ट्रायल जरूर लें, ताकि इसका इंजन, गियरबॉक्स को अच्छी तरह से चेक किया जा सके। कम से कम 1 से 2 किमी। गाड़ी चली लेने के बाद गाड़ी से रुकने दें और बोनट खोल कर अय्यल डिप आउट हो जाएं। अगर उस जगह से स्मोक आ रहा है या ऑयल के छींटे आ रहे हैं तो एक बार कंपनी में जरूर सलाहकार कर लें, क्योंकि यह प्रॉब्लम तब आती है, जब इंजन सही तरह से काम नहीं कर रहा होता है। कोशिश करें कि सर्टिफाइड कार ही चाहे।

6. गाड़ी एक्सीलटल तो नहीं है, ऐसे चेक कर सकते हैं
पहला:
गाड़ी एक्सीलटल तो नहीं एक आम आदमी के लिए इसका पता लगाना मुशिकल है लेकिन एक्सपर्ट ने बताया है कि डूम, पिलर और चेसिस से इसका पता लगाया जा सकता है। गाड़ी के चेसिस को नीचे की तरफ से चारों ओर से और देखें कि कहीं कोई प्ले या बेंड तो नहीं, अगर कहीं प्ले या बेंड दिखाई पड़ता है, तो कुछ चमक हो सकती है।
दूसरा: बोनट ओपनकर इंजन के पीछे वाला हिस्सा जहाँ सस्पेंशन दिखाई देते हैं वहाँ देखें। यहां आपको डूम दिखाई देगा, जिसके ऊपर सस्पेंडशन होता है। एक्सीडेंट होने पर सबसे पहले यही हिस्सा होता है। इस पर कंपनी की पेस्टिंग होती है। एक्सीडेंट होने पर यदि एक बार पेस्टिंग निकल जाए, तो फिर इसे दोबारा नहीं बनाया जा सकता है। कंपनी सिर्फ नई गाड़ियों पर पेस्टिंग करके खाती है, पुरानी गाड़ी पर दोबारा पेस्टिंग नहीं करती है। तो ड्यूम की पेस्टिंग देख कर आप गाड़ी के एक्सीलटल होने का पता लगा सकते हैं।
तीसरा: इसके अलावा पिलर्स से भी काफी हद तक गाड़ी के एक्सीलटल होने का पता लगाया जा सकता है। जैसे ही दरवाजे खुलेंगे तो वहां पिलर्स पर लगी रबर को हटा कर देखें, यहां बहुत सारे डीओटी नजर आएंगे, अगर ये डॉट में कहीं से क्रेक या जॉइंट दिखाई दें, तो भी गाड़ी के एक्सीटेबल होने का पता लगाया जा सकता है।
चौथा: गाड़ी को बिल्कुल समतल जगह पर खड़ी कर लें। हैचबैक गाड़ी है तो कार से 6 से 7 फीट और अगर एसयूवी है तो nine से 10 फीट दूर केंद्र में खड़े हो जाएं और गाड़ी की बनावट को ध्यान से देखें, इसे पूरी गाड़ी के बैक साइड से भी करना है। अगर आपको दोनों तरफ से गाड़ी की बनावट में कोई अंतर दिख रहा है (यानी कुछ झूठ या उठा हुआ दिख रहा है) तो उसमें भी अंजाजा लगाया जा सकता है कि गाड़ी एक्सीलटल हो सकती है। इसकी पुष्टि करने के लिए जिस तरफ से खंडट हो, उस तरफ की रबर खोलकर पिलर्स की पेस्टिंग चेक कर सकते हैं। क्योंकि एक बार पेस्टिंग बिगड़ जाने पर उसे उसी फिनिशिंग से बनाना मुश्किल है।

7. जब तक पूरे पेपर्स न मिलें, गाड़ी न हो

डीलर्स के पास गाड़ियां कई स्थानों से आती है। ज्यादातर शोरूम से एक्सचेंज किए गए गाड़ी होती है, तो कुछ सीधे ग्राहकों को बेचने के लिए दे जाते हैं। सेकंड हफ्तों की गाड़ी चाहिए तो इन डॉक्यूमेंट्स पर ध्यान दें …

पंजीकरण कार्ड (RC): यह गाड़ी का सबसे जरूरी दस्तावेज है या कह सकते हैं कि यह गाड़ी की पूरी कुंडली होती है। गाड़ी कब बनी, कब रजिस्टर्ड हुई, मॉडल नंबर, चेसिस नंबर, कलर, बॉडी टाइप सब कुछ इस कार्ड पर होता है। सेकंड हैड गाड़ी खरीदता है सबसे पहले उसका पंजीकरण कार्ड चेक करें। कार्ड पर देखें कि गाड़ी पर कोई लोन तो नहीं है। इस बात की जानकारी कार्ड के सबसे निचले हिस्से में दी होती है, गाड़ी जिस बैंक से फाइनेंस होती है उसका नाम नीचे ही लिखा होता है। अगर RC पर बैंक का नाम लिखा है, तो सबसे पहले कार बेचने वाले से बैंक की NOC जरूर ले लें वर्ना गाड़ी ट्रांसफर कराने में दिक्कत आ गई। गाड़ी फाइनेंस है या नहीं इसकी जानकारी आप RTO के साइट पर जाकर Hypothicated ऑप्शन पर क्लिक करके भी देख सकते हैं।

संबंधित थाने में जाकर क्राइम रिपोर्ट निकवाएं: RTO पर आपको एड्रेस मिल जाएगा, तो भविष्य में किसी भी तरह की समस्या से बचने के लिए सबसे पहले संबंधित थाने में जाकर गाड़ी की क्राइम रिपोर्ट निकलवाएं। यह पुलिस हेडक्वाटर (PHQ) से भी निकलवाई जा सकती है। इससे ये पता चलता है कि कहीं आपके द्वारा किए जा रहे गाड़ी किसी तरह के क्राइम में इस्तेमाल किया गया तो नहीं हुआ या उस पर किसी तरह का केस नहीं है। साथ ही संबंधित क्षेत्र के आरटीओ से गाड़ी के ऊपर किसी प्रकार के संयोजन होने की ना होने की जानकारी भी ली जा सकती है, वर्ना यह आपके लिए सरदर्द बन सकता है।

सेल लेटर की महत्वपूर्णता समझें: गाड़ी बेच रही हो या खरीद रहें हों ऐसे में सेल लेटर काफी महत्वपूर्ण दस्तावेज है। गाड़ी बेच रहें हों तो आरटीओ में जाकर सेल लेटर पर साइन करना ना और इसलिए भविष्य में गाड़ी से कोई दुर्घटना होती है, तो आप जिम्मेदार नहीं होंगे, जिस गाड़ी बेची है उसके साथ एक एग्रीमेंट भी बनाया जा सकता है। ठीक इसी प्रकार की गाड़ी खरीदने के लिए समय भी सेल लेटर की अहमियत को समझने और डीलर (या जिससे कार खरीद रहे हों) से सेल लेटर जरूर मांगे, जिस पर आरटीओ की सील और साइन लगे होते हैं, जिससे गाड़ी अपने नाम उपलब्ध कराने में कोई कठिनाई नहीं होती है हो।

नोट- सभी पॉइंट्स यूज्ड कार डीलर सूर्य यादव (कंबल कंपनी जोन, भोपाल) से बातचीत के आधार पर

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