कार के लिए बेस्ट पीपीएफ कोटिंग | क्या आप सूर्य में कार के रंग के फीके होने की चिंता कर रहे हैं! वर्षों से रंग सुरक्षित रखने के लिए कार में पेंट प्रोटेक्शन फिल्म लगाइए और स्क्रैच पर सेल्फ हीलिंग | कार का कलर फीका गिरने जाने का है टेंशन! तो लगवा सकते हैं पेंट प्रोटेक्शन फिल्म (पीपीएफ); कल को सालों साल सुरक्षित रखते हुए, स्क्रैच पड़ने पर खुद भी ठीक हो जाएगा

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  • कार के लिए बेस्ट पीपीएफ कोटिंग | क्या आप सूर्य में कार के रंग के फीके होने की चिंता कर रहे हैं! कार में पेंट प्रोटेक्शन फिल्म लगाइए ताकि रंग बरसों तक सुरक्षित रहे और स्क्रैच पर सेल्फ हीलिंग हो

नई दिल्लीFour मिनट पहले

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बाजार में चीनी ब्रांडों की पीसीबीएफ भी उपलब्ध है, जिन पर कोई अप्रेंटिस नहीं मिलता है, कोशिश करें कि ब्रांडेड पीसीएफ ही लगवाएं, जिनके साथ बिल और एंड कार्ड जरूर मिले।

  • एक्सपर्ट्स ने बताया कि ब्रांड-टू-ब्रांड इसकी थिकनेस 180 माइक्रोन से 300 माइक्रोन तक होती है
  • यह प्लास्टिक की काफी मजबूत परत होती है, जो किसी भी तरह के स्क्रैच को झेल सकती है

हर व्यक्ति को अपनी गाड़ी से खास लगाव होता है, कोई भी अपनी गाड़ी पर एक भी स्क्रैच नहीं देखना चाहता है। लेकिन कुछ आकर्षक तत्व मानकर गाड़ी पर अपनी कलात्मक दिखाने जाते हैं, कोई चाबी तो कोई नुकीली चीज से स्क्रैच लगा जाती है तो कई बार ड्राइविंग ड्राइविंग करने वाले बाइकर्स गाड़ी में स्क्रैच मार कर निकल जाते हैं। ऐसे में अगर आप अपनी गाड़ी के कलर कोिट हैं और सालों साल नए जैसा रखना चाहते हैं, ताकि उसकी खूबसूरती बरकरार रहे तो उसपर पीसीबीएफ यानी पेंट प्रोटेक्शन फिल्म लगवा सकते हैं। इसके फायदे और नुकसान को जानने के लिए हमने एक्सपर्ट राहुल श्योरान से बात की, जिन्होंने हमारे साथ GBF कोटिंग के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी के लिए …

क्या होता है PPF, क्यों लगवानी चाहिए?

  • पीसीएफ का मतलब पेंट प्रोटेक्शन फिल्म है। एक्सपर्ट ने बताया कि जिन लोगों को अपनी कार से प्यार है या जिनसे धूप में कार का कलर फेड हो जाने की चिंता है, तो उनके लिए पीसीबीएफ सबसे करीब उपाय है। इसकी थिकनेस सिरेमिक कोटिंग से कहीं ज्यादा होती है।
  • ब्रांड-टू-ब्रांड इसकी थिकनेस 180 माइक्रोन से 300 माइक्रोन तक होती है जबकि सिरेमिक की थिकनेस इसकी एक तिहाई होती है।]साथ ही सिरेमिक कोटिंग लिक्विड होती है, ऐसे में बार-बार कार वॉश करने से निकल सकती है जबकि पीसीएफ प्लास्टिक लेयर है तो इसे कार कृष्णा से कोई फर्क नहीं पड़ता। इसे लगवाने से गाड़ी में स्क्रैच लगने की टेंशन ही खत्म हो जाती है साथ ही सालों साल कार के कलर की चमक भी बरकरार रहती है।

यह नई गाड़ी में ही कराए या पुराने में भी करा सकते हैं?

  • जरूरी नहीं कि नई गाड़ी है तो उसके कल को कोई नुकसान नहीं पहुंचे। भारत में तापमान दिनों दिनों बढ़ता जा रहा है। ऐसे में चाहे गाड़ी नई हो या पुरानी, ​​कलर फेड होने का खतरा हमेशा बना रहता है, खासतौर से उन्हें जिनकी गाड़ी का कलर डार्क है। कुछ ब्रांडों की गाड़ियों में अच्छी क्वालिटी का कलर नहीं देते, जो कुछ समय बाद फीके पड़ने लगते हैं।
  • पीसीबीएफ हर एक गाड़ी मालिक को करवाना चाहिए, जो अपनी को प्यार करते हैं, उसे ये सहज ज्ञान समझते हैं, क्योंकि 10-12 लाख खर्च करने के बाद सभी चाहते हैं कि उनकी गाड़ी सुरक्षित रहे। देखा जाए तो पीपीएफ लगवाने का खर्च प्रति पैनल जितना है उतना गिर जाता है, जैसा कि पैनल पैनल करवाना पर पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, कार के दरवाजे पर स्क्रैच पड़ने पर अगर आप शोरूम से रि-पेंट करवाते हैं तो उसी के तहत खर्च करेंगे, क्योंकि उसके पीसीएफ लगवाने में आता है। लेकिन पीसीएफ लगवाने के बाद बार-बार धोखा करवाने का झंझट खत्म हो जाता है। अगर उसके बाद कोई स्क्रैच गिरता भी है, तो पीसीबीएफ उस झेल जाएगा और ओरिजनल पीस को सेफ स्कैन। खास बात यह है कि डार्क कलर पर पीसीबीएफ लगवाई जाती है तो यह उसकी शाइनिंग दो से तीन गुना तक बढ़ जाती है।

कैसे लगाई जाती है PCF, कितना समय लगता है?

पीसीएफ लगवाने में लगभग 2 से Three दिन का समय लगता है। क्योंकि गाड़ी के डोर-ब्रांड्स, साइड मिरर्स, क्लेडिंग, बैज जैसी चीजों को पहले निकाला जाता है। कई गाड़ियों में हेडलाइट-टेललाइट्स पर भी GBF किया जाता है लेकिन कई गाड़ियों की हेडलाइट्स-टेललाइट्स काफी जिग-जैग होती हैं, ऐसे में उन पर फिल्म नहीं लग पाती। वैसे डोर ब्रांडल्स पर कभी-कभी बहुत अधिक पीसीएफ नहीं लगाया जाता है। कुछ लोग जल्दी के चक्कर में गाड़ी के हिस्सों को खोलने से कतराते हैं, ऐसे में प्रॉपर फिनिशिंग नहीं आ पाती।

यह पीपीएस की पूरी पूरी है …

1. डीईपी सफाई (गहरी सफाई)

किसी भी गाड़ी पर पीसीएफ करने से पहले उसे अच्छी तरह से कम से कम एक से दो बार वॉश किया जाता है। सुनिश्चित किया जाता है कि गाड़ी पर किसी भी तरह की गंदगी न हो। विशेष रूप से कोने पर जहां गंदगी लगने की सबसे ज्यादा संभावना होती है।

2. क्लेइंग (क्लेइंग)

वाश करने के बाद कार क्लेइंग पूरी से गुजरती है। इस प्रक्रिया में विशेष तरह से कि चिकनी मिट्टी को लुब्रिकेंट के जरिए कार की बॉडी पर रग जाती है, जिससे बारीक से बारीक कचरा निकल जाए, इससे सरफेस और ज्यादा साफ हो जाता है। इसे क्ले ग्लव्स पहन कर किया जाता है।

3. कंपाउंडिंग (कम्प्यूटिंग)

इलेक्ट्रॉनिक्स और क्लेइंग के बाद सरफेस की कंपाउंडिंग होती है। इसके सरफेस पर लगे स्वेलिंग और हा लाइन स्क्रैच हटाए जाते हैं। स्वेलमार्क खासतौर से गाड़ी को कपड़े से साफ करने के दौरान पड़ते हैं, जो राउंड शेप में होते हैं, ये ज्यादातर ब्लैक और रेड कलर की गाड़ियों में ज्यादा दिखाई देते हैं। उन्हें क्लियर करने के लिए कंपाउंडिंग की जाती है। स्क्रैच के हिसाब से अलग अलग ग्रेड के कंपाउंड यूज किए जाते हैं। कंपाउंडिंग डुअल एक्शन समर्थर से की जाती है, इसकी मोटर 4-वे यानी अप-डाउन और लेफ्ट-राइट तरीके से चलती है।

4. आईपीए (आईपीए)

अंत में सरफेस को पूरी तरह से साफ करने के लिए आईपीए किया जाता है। इसके लिए आइसोप्रोपाइल अल्कोहल यूज किया जाता है, जो कंपाउंडिंग के दौरान सतह पर छूटी झर को पूरी तरह से साफ करता है, ताकि पीसीबीएफ अच्छी तरह से सरफेस पर चिपके।

5. ट्यूबफिल स्टार्ट

आईपीए के बाद पीसीएफ संपूर्ण शुरू हो जाता है। पीपीएस गाड़ी पर लगने से पहले पूरे पीपीएफ पर एक सोपी (साबुन) सॉल्यूशन का छिड़काव किया जाता है और वहीं सॉल्यूशन गाड़ी की बॉडी पर भी स्प्रे किया जाता है। इसके बाद पीसीएफ को सरफेस पर लगाकर, स्क्वीजी (निचोड़) की मदद से पानी बाहर निकाला जाता है। यह पूरी तरह से कांच पर फिल्म चढ़ने जैसी होती है। यह पूरी प्रक्रिया बंद कमरे में की जाती है, जहां डस्ट लगने की संभावना न के बराबर होती है। जिस जगह पर पीसीबीएफ नहीं हो पाती, उस जगह ग्राहकों को सिरेमिक कोटिंग करना की सलाह दी जाती है, जिससे प्रोटेक्शन मिल संभव है। इसे पूरी तरह में तीन दिन तक का समय लगता है जो गाड़ी के साइज पर निर्भर करता है, क्योंकि पीसीबीएफ लगने के बाद उसे सूखने के लिए भी पर्याप्त समय देना होता है खासतौर से सर्दियों के मौसम में।

पीसीबीएफ उपलब्ध कराने में कितना खर्च आता है?

  • बाजार में पीसीएफ (पेंट प्रोटेक्शन फिल्म) दो तरह की आती है। पहला ग्लोस, जिसमें सेल्फ हीलिंग और नॉन सेल्फ हीलिंग का ऑप्शन मिलता है। दूसरा मैट, इसमें भी सेल्फ हीलिंग और नॉन सेल्फ हीलिंग का ऑप्शन मिलता है। मैट उन लोगों के लिए ठीक है, जो अपनी कार का कलर चेंज कर उसे नया लुक देना चाहते हैं।
  • वर्तमान में पीसीबीएफ की मैन्युफैक्चरिंग भारत में नहीं हो रही है, इसलिए वे अलग-अलग देशों से एक्सपोर्ट किए जाते हैं। पीसीएफ की कीमत ब्रांड के हिसाब से अलग अलग है। ब्रांड पीसीएफ के साथ बाकायदा आपको बिल, लोट नंबर और एंड कार्ड तक मिलता है।
  • ब्रांडेड सेल्फ हीलिंग बैंगफ की बात की जाए तो इसकी लागत (क्रेटा साइज कार के लिए) 65 हजार से 1.35 लाख तक होती है, जो कार के साइज और जीबीएफ के ब्रांड पर निर्भर करती है। नॉन सेल्फ हीलिंग पीसीबीएफ की लागत 35 हजार से 50 हजार रुपये तक जाती है। हालांकि, बाजार में कई चीनी ब्रांड भी उपलब्ध है, जिन पर कोई स्वतंत्र नहीं मिलता है।
  • नोट- नॉन-ब्रांडेड PCF पर कुछ समय बाद पीले पड़ने लगते हैं, यह पीलेपन खासतौर से व्हिट कारों पर जल्दी नज़र आने लगता है। ऐसे में हमेशा ब्रांडेड पीसीएफ लगवाएं और दुकानदार से बिल, लोट नंबर और एंड कार्ड जरूर मांगे, ताकि किसी भी परेशानी से बचा जा सके। किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं आती। ग्राहक अपनी ज़रूरत के हिसाब से अलग अलग भाग पर भी GBF लगवा सकता है।

नोट- सभी पॉइंट राहुल श्योरान (WRAPAHOLOX, द्वारका, नई दिल्ली) से बातचीत के आधार पर।

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