दूसरी नौकरी | शेखचिल्ली की कहानी | Shekh chilli story |

दूसरी नौकरी | शेखचिल्ली की कहानी | Shekh chilli story |

 

Shekh chilli story

 

Shekh chilli story:- पहले मालिक ने शेखचिल्ली को ठीक काम न करने के कारण निकाल ही दिया तो शेखचिल्ली एक सेठ के यहाँ पहुंचा और हाथ जोड़कर सेठजी से बोला-हुजूर मैं बहुत गरीब आदमी हूँ आप मुझे खिदमत के लिये नौकरी पर रख लीजिये।
सेठजी ने कहा-ठेक है, मगर तुमको मुझे एक इकरार नामा लिखकर देना होगा। अगर तुम उसके अनुसार काम न करोगे या नौकरी चोदोगे तो तुम्हारे नाक-कान का लिये जाएंगे। यदि हम तुमहें नौकरी से अलग करने को कहेंगे तो तुम हमारे नाक-कान काट देना।
सब काम इत्यादि लिखकर एक इकरार नामा तैयार किया गया तो दोनों उस पर अपने-अपने हस्ताक्षर करके सो रहे। सुबह उठते ही शेखचिल्ली ने सोचा कि रोज सर और दाढी का काम बड़ा बे मौक़ा है इसलिए उनकी सफाई ही करवा देनी चाहिए। ऐसा सोचकर उसने पानी में छूना पीसकर डाल दिया। उस पानी में जब सेठ जी ने दाढी को और उनकी स्त्री ने बालों को धोया तो सब गिर गए। सेठ जी ने खफा होकर कहा-यह क्या?

शेख्चिल्ले बोला-इकरार नामें के खिलाफ तो मैंने कुछ नहीं किया। सेठजी की किताबों का बैग भी शेखचिल्ली रोज दफ्तर ले जाया करता था। एक दिन शेखचिल्ली ने वैसा ही दूसरा बैग बनाकर उसमें ईटें भर दीन और दूसरे दिन ले जाकर दफ्तर में रख दिया। जब सेठ जी ने बैग खोला तो हक्के-बक्के रह गए और सबको हंसता देखकर बड़े शर्मिन्दा हुए अब सेठ जी समझ गए कि नौकर कुछ उस्ताद मिला है। शेखचिल्ली की अगली शर्त थी प्रतिदिन घोड़े को चराकर लाने की शर्त के अनुसार शेखचिल्ली घोड़े को लेकर चराने गए तो घोड़े को छोड़कर और चादर तानकर सो रहे। रात होने पर घोड़े लेकर वापिस आए तो रास्ते में सौदागर बोला-क्यों भाई घोड़ा बेचोगे?

शेखचिल्ली ने उत्तर दिया- हाँ साहब बेचेंगे। मगर 50 रू लेंगे। सौदागर ने खा-नहीं। तब शेखचिल्ली बोले 40 ही दे देना पर घोड़े की थोड़ी पूँछ काट लेने दो। शेखचिल्ली सौदागर से रूपया और थोड़ा सा पूँछ का टुकडा लेकर चल दिया और जाते ही चिल्लाने लगा- सेठ जी सेठजी घोड़े को चूहे अपने बिल में घटित कर ले गए। सेठ जी आए तो उन्हें पूँछ दिखाकर कहने लगा- देखिये घोड़े को खींचने पर उसकी पूँछ टूट कर रह गई। सेठ जी उसे नौकरी से अलग होने को कहते तो नाक-कान कटवाने पड़ते थे अत चुप होकर रह गए। [ Shekh chilli story ]
शर्त में यह भी लिखा था कि शेखचिल्ली घर में जलाने को लकड़ी भी लाया करेगा। जब शेखचिल्ली लकड़ी लेकर आया तो उसने आते ही घर में रख कर आग लगा डी। सेठजी उस समय मन्दिर गे हुए थे। आने पर उन्होंने शेखचिल्ली से कहा- तुमने हमारे घर में आग क्यों लगाई? अब हम तुमको नौकर नहीं रखेंगे। शेखचिल्ली ने इकरार नामे की बात कह दी। सेठजी ने तंग आकर अपनी पत्नी से कहा- अब तो इससे नाक-कान बचाना ही कठिन है। क्या किया जाए।
पत्नी ने कहा मैं आपके साथ पीहर चली जाती हूँ यह आप ही पीछे से भाग जाएगा। शेखचिल्ली ने यह सब बात सुन ली और रात को ही सेठजी के ले जाने वाले बक्से में जा बैठा। सुबह होने से पहले ही सेठजी और उसकी पत्नी बक्सा लेकर चल दिए। जब कुछ दूर चले गए तो सेठजी बोले कमबख्त से पीछा तो छूता अब वह नहीं आ सकेगा। ऐसे कहते हुए सेठजी व उनकी पत्नी चले जाते थे तो बक्से में बैठे शेखचिल्ली को पेशाब आ गया तो उसने संदूक में ही कर दिया। जब पेशाब बहकर सेठजी के मुंह पर आया तो सेठजी ने समझा की हलुवा बनाकर हमने संदूक में रखा था उसका घी बह रहा है। जब सेठजी ने संदूक उतार कर जमीन पर रखा तो झट संदूक में से शेखचिल्ली निकल आया और बोला-हुजूर के क़दमों को तब तक नहीं छोड़ सकता जब तक नाक-कान न काट लूण। [ Shekh chilli story ]
सेठजी ने कहा- क्यों? यह लो संदूक इसे सिर पर रख के ले चलो। परन्तु शेखचिल्ली ने इनकार कर दिया। लाचार सेठजी अपने ही सिर पर संदूक रखकर चले। जब ससुराल एक मील रह गई तो उन्होंने शेखचिल्ली से कहा-जाओ ससुराल कह दो सेठ जी आए है वह फलां जगह पर बैठे हैं उन्हें ले आओ। शेखचिल्ली ने ससुराल जाकर कहा-सेठ जी बीमारी की हालत में हैं कठिनता से आए हैं। उन्हें लिवा लाएं। रात को जब खाने का वक्त आया तो सेठ जी के आगे डाल रखी और शेखचिल्ली को आचे-२ पकवान खाने को मिले। रात को सेठजी को पाखाना लगा तो शेख जी बोले बाहर कहाँ जाएंगे यहीं इसी हंडिया में कर दीजिये। सेठ जी ने वैसा ही किया। सुबह होने पर बोले-जाओ हंडिया फेंक आओ। परन्तु शेखचिल्ली ने मना कर दिया। लाचार सेठ जी स्वयं हंडिया कपडे में लपेट कर फेंकने चले। चौखट पर ठोकर लगी तो हंडिया छूट कर नीचे गिर गई। सबके बदन पर पाखाने के छींटे पर और थू-थू करते भागे। [ Shekh chilli story ]

 

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