भाग्य की बात | Moral Stories in Hindi | Hindi story kids |

भाग्य की बात | Moral Stories in Hindi | Hindi story kids |

 

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Hindi story kids:- दो मित्र थे। एक ब्राहमण था, दूसरा भाट। भाट ने एक दिन अपने मित्र से कहा, ”चलो, राजा के दरबार में चलें। यदि गोपाल राजा खुश हो गया तो हमारे भाग्य खुल जाएंगे।“

ब्राहमण ने हंसकर उसकी बात टालते हुए कहा, ”देगा तो कपाल, क्या करेगा गोपाल? भाग्य में होगा, वही मिलेगा।“

भाट ने कहा, ”नहीं, देगा तो गोपाल, क्या करेगा कपाल! गेपाल राजा बड़ा दानी है, वह हमें अवश्य बहुत धन देगा।“

दोनों में इस प्रकार विवाद होता रहा और अंत में गोपाल राजा के दरबार में जाकर दोनों ने अपनी अपनी बात कही। भाट की बात सुनकर राजा बहुत प्रसन्ना हुआ। ब्राहमण की बात सुनकर उसे क्रोध आया। उसने दोनों को दूसरे दिन दरबार में आने की आज्ञा दी। [ Hindi story kids ]

दोनों मित्र दूसरे दिन दरबार में पहुंचे। राजा की आज्ञा से उनके सिपाहियों ने ब्राहमण को एक मुट्टी चावल, दाल और कुछ नमक दे दिया। भाट को एक सेर चावल, एक सेर घी, और एक कद्दू दिया। राजा के आदेश से कद्दू में सोना भर दिया गया। राजा ने कहा, ”अब जाकर बना खा लो। शाम को फिर दरबार में हाजिर होना।“ [ Hindi story kids ]

दरबार से चलकर वे नदी किनारे के उस स्थान पर पहुंचे, जहां उन्होंने रात बिताई थी। भाट मन ही मन सोच रहा था, ‘न जाने क्यों राजा ने ब्राहमण को तो दाल दी और मुझे कद्दू दे दिय। इसे छीलो, काटो और फिर बनाओ इसकी तरकारी। कौन करे इतना झंझट? ऊपर से यह भी डर है कि कहीं इसके खाने से फिर से कमर का पुराना दर्द न उभर आये।’ ऐसा सोचकर उसने ब्राहमण से कहा, ”मित्र कद्दू खाने से मेरी कमर में दर्द हो जाएगा। इसे लेकर तुम अपनी दाल मुझे दे दो।“ ब्राहमण ने उसकी बात मान ली। अपना अपना सामान लेकर दोनों रसोई में जुट गए। [ Hindi story kids ]

भाट दाल चावल खाकर एक आम के पेड़ के नीचे लेट गया। ब्राहमण ने जब कद्दू काटा तो उसे वह सोना दिखाई दिया, जो राजा ने उसमें भरवा दिया था। उसने मन ही मन सोचा, ‘जो मेरे भाग्य में था, मेरे पास आ गया। गोपाल तो इसे भाट को दे देना चाहते थे।’ उसने सोना एक कपड़े में बांध लिया। कद्दू का आधा भाग बेचकर आधे की तरकारी बना ली। वह भी खा पीकर सो गया।

संध्या के समय दोनों मित्र फिर गोपाल राजा के दरबार में पहुंचे। ब्राहमण ने शेष आधा कद्दू एक कपड़े में लपेटकर अपने पास ही रख लिया था। राजा ने ब्राहमण की ओर देखकर पूछा, ”अब तो मान लिया- देगा तो गोपाल, क्या करेगा कपाल?“

ब्राहमण ने आधा कद्दू राजा की ओर बढ़ा दिया और नम्रता से सिर झुकाकर कहा, ”नहीं महाराज, देगा तो कपाल, क्या करेगा गोपाल?“

राजा ने सोचा कि ब्राहमण सच कह रहा है। ब्राहमण के भाग्य में सोना था, भाट के नहीं और इसीलिए भाट ने कद्दू ब्राहमण को दे दिया। राजा ने कहा, ”तुम्हारा कहना ठीक है। देगा तो कपाल, क्या करेगा गोपाल।“ [ Hindi story kids ]

उसने दोनों को भेंट में धन देकर विदा कर दिया।

 

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