प्रेमचंद की कहानी

आख़िरी तोहफ़ा | प्रेमचंद की कहानी | Last Gift |

आख़िरी तोहफ़ा | प्रेमचंद की कहानी | Last Gift |     Last Gift:- “सारे शहर में सिर्फ एक ऐसी दुकान थी, जहॉँ विलायती रेशमी साड़ी मिल सकती थीं। और सभी दुकानदारों ने विलायती कपड़े पर कांग्रेस की मुहर लगवायी थी। मगर अमरनाथ की प्रेमिका की फ़रमाइश थी, उसको पूरा करना जरुरी था। वह कई …

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मन का प्राबल्य | प्रेमचंद की कहानी | Preponderance of mind |

मन का प्राबल्य | प्रेमचंद की कहानी | Preponderance of mind |     Preponderance of mind:- “मानव हृदय एक रहस्यमय वस्तु है। कभी तो वह लाखों की ओर ऑख उठाकर नहीं देखता और कभी कौड़ियों पर फिसल पड़ता है। कभी सैकड़ों निर्दषों की हत्या पर आह ‘तक’ नहीं करता और कभी एक बच्चे को …

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अलग्योझा | प्रेमचंद की कहानी | Premchand ki kahani Algoza |

अलग्योझा | प्रेमचंद की कहानी | Premchand ki kahani Algoza |     Premchand ki kahani Algoza:- “भोला महतो ने पहली स्त्री के मर जाने बाद दूसरी सगाई की, तो उसके लड़के रग्घू के लिए बुरे दिन आ गए। रग्घू की उम्र उस समय केवल दस वर्ष की थी। चैने से गॉँव में गुल्ली-डंडा खेलता …

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मंदिर और मस्जिद | प्रेमचंद की कहानी | Temple and Mosque |

मंदिर और मस्जिद | प्रेमचंद की कहानी | Temple and Mosque |     Temple and Mosque:- “चौधरी इतरतअली ‘कड़े’ के बड़े जागीरदार थे। उनके बुजुर्गो ने शाही जमाने में अंग्रेजी सरकार की बड़ी-बड़ी खिदमत की थीं। उनके बदले में यह जागीर मिली थी। अपने सुप्रबन्धन से उन्होंने अपनी मिल्कियत और भी बढ़ा ली थी …

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क़ातिल | प्रेमचंद की कहानी | Premchand ki kahani Katil |

क़ातिल | प्रेमचंद की कहानी | Premchand ki kahani Katil |     Premchand ki kahani Katil:- “जाड़ों की रात थी। दस बजे ही सड़कें बन्द हो गयी थीं और गालियों में सन्नाटा था। बूढ़ी बेवा मां ने अपने नौजवान बेटे धर्मवीर के सामने थाली परोसते हुए कहा-तुम इतनी रात तक कहां रहते हो बेटा? …

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विदुषी वृजरानी | प्रेमचंद की कहानी | Premchand ki kahani School worker |

विदुषी वृजरानी | प्रेमचंद की कहानी | Premchand ki kahani School worker |     Premchand ki kahani School worker:– “जब से मुंशी संजीवनलाल तीर्थ यात्रा को निकले और प्रतापचन्द्र प्रयाग चला गया उस समय से सुवामा के जीवन में बड़ा अन्तर हो गया था। वह ठेके के कार्य को उन्नत करने लगी। मुंशी संजीवनलाल …

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माधवी | प्रेमचंद की कहानी | Premchand ki kahani Madhavi |

माधवी | प्रेमचंद की कहानी | Premchand ki kahani Madhavi |     Premchand ki kahani Madhavi:- “कभी–कभी वन के फूलों में वह सुगन्धित और रंग-रुप मिल जाता है जो सजी हुई वाटिकाओं को कभी प्राप्त नहीं हो सकता। माधवी थी तो एक मूर्ख और दरिद्र मनुष्य की लड़की, परन्तु विधाता ने उसे नारियों के …

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प्रेम-सूत्र | प्रेमचंद की कहानी | Premchand ki kahani Prem-Sutra |

प्रेम-सूत्र | प्रेमचंद की कहानी | Premchand ki kahani Prem-Sutra |     Premchand ki kahani Prem-Sutra:- “संसार में कुछ ऐसे मनुष्य भी होते हैं जिन्हें दूसरों के मुख से अपनी स्त्री की सौंदर्य-प्रशंसा सुनकर उतना ही आनन्द होता है जितनी अपनी कीर्ति की चर्चा सुनकर। पश्चिमी सभ्यता के प्रसार के साथ ऐसे प्राणियों की …

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ईदगाह | प्रेमचंद की कहानी | Premchand ki kahani idgah |

ईदगाह | प्रेमचंद की कहानी | Premchand ki kahani idgah |     Premchand ki kahani idgah:- “रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभाव है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है, आसमान पर कुछ अजीब लालिमा है। आज का सूर्य देखो, कितना …

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वरदान | प्रेमचंद की कहानी | Premchand ki kahani Vardaan |

वरदान | प्रेमचंद की कहानी | Premchand ki kahani Vardaan |     Premchand ki kahani Vardaan:- “विन्घ्याचल पर्वत मध्यरात्रि के निविड़ अन्धकार में काल देव की भांति खड़ा था। उस पर उगे हुए छोटे-छोटे वृक्ष इस प्रकार दष्टिगोचर होते थे, मानो ये उसकी जटाएं है और अष्टभुजा देवी का मन्दिर जिसके कलश पर श्वेत …

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